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Other Input Device  कौन कौन हैं
Post By@ Co-Funder# Vinay Kumar Verma 

किसी भी निर्देश एवं डाटा को कंप्यूटर में इनपुट डिवाइस के माध्यम से ही उपलब्ध कराया जा सकता हैं कंप्यूटर  उपलब्ध निर्देश को प्रोससे करता हैं 

Scanner
स्कैनर का इस्तेमाल किसी हार्ड कॉपी या फोटोग्राफी को स्कैन कर डिजिटल फॉर्म में कन्वर्ट कर कंप्यूटर में रख सकते हैं यह एक जेरोक्स मशीन की तरह कार्य करता हैं जो किसी हार्ड कॉपी का बिलकुल दूसरी प्रति सॉफ्ट फॉर्म में कन्वर्ट कर देता हैं इस डिवाइस को हम कंप्यूटर सिस्टम में usb या पैरेलर पोर्ट से कन्वर्ट कर सकते हैं जिसके लिए इसका ड्राईवर इन्स्टाल करना पड़ेगा.




Keyboard, Mouse and VDU Keyboard
Post By@Co-Founder# Vinay Kumar Verma
 
आज के इस पोस्ट में मैं बताऊंगा की Keyboard, Mouse and VDU Keyboard  क्या है और ये कैसे WORK करता है ! 


कीबोर्ड एक इनपुट डिवाइस हैं इसके द्वारा प्रोग्राम एवं डाटा को कंप्यूटर में अन्तर किया जा सकता हैं
यह टाइराइटर के कीबोर्ड जैसा ही होता हैं इनमे अल्फ़ाबेट्स नम्बर स्पेशल कीज फक्शन key, movement key, (arrowkey, pageup, pagedown, end, home) होता हैं जब एक key दबाई जाती हैं तब एक इलेक्ट्रॉनिक सिंगल उत्पन्न होता हैं (ASCII) जो कीबोर्ड एनकोडर नाम के इलेक्ट्रॉनिक सर्किट द्वारा डिटेक्ट किया जाता हैं

key, movement key, (arrowkey, pageup, pagedown, end, home)
Mouse

माउस कंप्यूटर की सबसे महत्वपूर्ण पाईटिंग डिवाइस हैं यह भी एक इनपुट डिवाइस हैं माउस का प्रयोग स्क्रेच डायग्रामस आदि ड्रा करने में, टेक्स्ट को सेलेक्ट करने इंस्ट्रकशन देने आदि कार्य के लिए जाता हैं माउस दो प्रकार का होता है
1 मेकेनिकल

2 आप्टिकल माउस
इनमे दो बटन होती हैं लेफ्ट एवं राईट बटन तीसरी बटन स्क्रोल बटन भी आप्टिकल माउस में होती हैं 
MOUSE


VDU (Visual Display Unit) Monitor)

यह एक साफ्ट विसुअल आउटपुट डिवाइस हैं जिस पर आउटपुट को देखा जाता हैं यह टेक्नोलॉजी के अनुसार दो प्रकार का होता हैं

1 CRT (Cachode Ray Tube)

इसमें कैथोड रे तुयुब लगी होता हैं जो इसमें काचोड़े किरणे फ्लेरेसेंसे स्क्रीन पर गिरती हैं और डीस्प्लेक्ट होकर फीचर बनाती हैं ये दो प्रकार का होता हैं
 
CRT (CATHODE RAY TUBE)
1 मोनोक्रोम – जो की ब्लैक एंड वाइट फीचर दिखाती हैं
2 कलर- इसमें तीन प्रकार के फास्फोरस जो की लाल, हरा, और नीला, रंग होने के कारन कलर फीचर बनाता हैं


LCD( Liquide Cristal Display)
LCD (LIQUID CRISTAL DISPLAY)
LCD टेक्नोलॉजी लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले टेक्नोलॉजी लाइट को माडयुलेट करके फीचर बनाती हैं थिन फिल्म ट्रांजिस्टर मैट्रिक्स तो बनाती हैं परन्तु मैट्रिक्स से लाइट नहीं निकालती हैं लेकिन लाइट इमिटिंग डायोड में लाइट यही से निकलती हैं अतः फीचर क्वालिटी काफी अच्छी होती हैं

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Central Processing Unit (C.P.U) क्या है 
Post By@Co-Founder# Vinay Kumar Verma
आज के इस पोस्ट में मैं बताऊंगा की Central Processing Unit (C.P.U)  क्या है और ये कैसे WORK करता है ! 




Central Processing Unit (C.P.U)  प्रोसेसिंग डिवाइस चौथे जनरेशन के कम्प्यूटर प्रोसेसर प्रोसेसिंग डिवाइस के रूप में उपयोग किया गया है इसमें लाखो सक्रिट लगी होती है एक कम्प्लीट साईकिल को काऊंट करने के लिए मदरबोर्ड पर एक क्लॉक लगा होता है जोकि फ्रीक्वेंसी को काउनट करता है डाटा / इंसट्रक्शन इनपुट डिवाइस द्वारा प्रोसेसर की तरह प्रोसेसिंग के लिए जाता है और प्रोसेसर उसे प्रोसेसर करके इनफार्मेशन के रूप में आउटपुट डिवाइस पर रिजल्ट देता है यह पूरा कार्य एक साईकिल में होता है पूरी प्रोसेसिंग प्रोसेसर के अन्दर होती है प्रोसेसर के तीन  भाग होते है !


1. Arithmetic Logic Unit [ अर्थमेटिक लॉजिक यूनिट ]यह C.P.U. का मुख्य भाग 
होते है जोकि तकिर्क एवम् अंकगणतीय कार्य को प्रोसेसर करता है जो भी यूजर 
के द्वारा बतौर इनपुट दिया जाता है उन पर जरुरी ओपरेशन कर चाहे वो अंकगणतीय हो तकिर्क हो मेमोरी यूनिट को भेज देते है जहाँ से ये कण्ट्रोल यूनिट की मदत से यूजर द्वारा निर्देशित आउटपुट मिडिया पर भेज दिया जाता हैं !

ये भी पढ़े ➥➥ Components Of Computer System | कम्प्यूटर सिस्टम के घटक

2. Control Unit [ कण्ट्रोल यूनिट ] जो की पुरे कम्प्यूटर को कण्ट्रोल करता है यह डाटा /  इंस्ट्रक्शन को एनालाइज करके किस प्रकार की डिवाइस को प्रोसेसिंग के लिए या आउटपुट के लिए भेजना हैं, ये सब कार्य यही करता है !

3. Memory unit [ मेमोरी यूनिट ]इस भाग में कण्ट्रोल यूनिट द्वारा निर्देशित ट्रक्स स्टोर होता है ताकि ALU को भेजा जा सके और पुनः  ALU से प्रोसेसिंग होने के नाद आउटपुट सुचना को तब तक स्टोर करता है जब तक कण्ट्रोल यूनिट इसे उचित आउटपुट मिडिया पर भेजने का निर्देश न दे ! इसे  रजिस्टर भी कहा जाता है जोकि प्रोसेसिंग के समय डाटा / इन्फोर्मेशन को अपने पास होल्ड रखता है जो प्रोसेसिंग के दुसरे स्टेप में प्रयोग होते हैं !

बस एक डाटा पाथ या परिपथ को कहते है जिसके माध्यम से डाटा के प्रोसेसिंग के दौरान डाटा को एक यूनिट से दुसरे यूनिट में भेजा जाता है

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Components of computer system | कम्प्यूटर सिस्टम के घटक 
Post By@Co-Founder#Vinay Kumar Verma

Components of computer system  [कंप्यूटर सिस्टम के घटक ] कम्प्यूटर सिस्टम 
कम्पोनेंट्स में कई तरह के कम्पोनेंट्स होते हैं कम्प्यूटर का मूल आवेदन  जो एक कम्प्यूटर को उसका कार्य करना संभव करते है, जो कुछ इस प्रकार है जैसे- कीबोर्ड, माउस, मानिटर, रैम, हार्डडिस्क, स्पीकर, और भी बहुत कुछ


आप नीचे दी गई तस्वीर में कंप्यूटर का घटक देख सकते हैं

Power Switch   पॉवर स्विच वो स्विच बटन होते है, जिससे एक कम्प्यूटर सिस्ट को चालू या बंद कर सकते है !
Power Switch 
Reset Button इस बटन की मदद से हम किसी कम्प्यूटर सिस्टम के चालू हालत में अपनी जरुरत के 
हिसाब से उसे पुनः स्टार्ट (रिस्टार्ट) कर सकते है !

Reset Button
CD/DVD ROM DRIVE  इस ड्राइव की मदद से हम किसी कम्प्यूटर सिस्टम में कोई सी0 डी0 या डी0 वी0 
डी0 को एक्सेस कर पते है  
CD/DVD ROM DRIVE 

➦➦➦Basic application of Computer [कंप्यूटर का मूल आवेदन ]

Floppy Drive ये ड्राइव किसी कम्प्यूटर सिस्टम में फ्लॉपी डिस्क को एक्सेस करने में इस्तेमाल होता है !  
Floppy Drive
Front USB port, Mic& Headphone slot  ये पोर्ट किसी USB ड्राईवर को एक्सेस करने में 
उपयोग होता है, जबकि माईक और हैडफ़ोन जैक स्लॉट किसी मैक्रोphone या हैडफ़ोन device को जैक वायर की मदद से कनेक्ट करने में मदद करता है !

Front USB port, Mic& Headphone slot 

Idicator light
ये वो सिंगेल लाइट होती है जो सिस्टम के स्टार्ट होने से चलते रहने तक जलती रहती है 

और सिस्टम के बंद होने पर स्वत बंद हो जाती है !

➥➥➥ History Of Computers कम्प्यूटर्स का इतिहास
Idicator light
Power Supply Socket यह सॉकेट कम्प्यूटर सिस्टम में पॉवर सप्लाई देने के लिए केवल को कनेक्ट 
करने में इस्तेमाल होता है जिससे पॉवर SMPS की मदद से जरुरी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेट तक पहुचता हैं!


Keyboard Socket इस सॉकेट की मदद से कम्प्यूटर सिस्टम में कीबोर्ड को कनेक्ट किया जाता है !

Keyboard Socket 

Mouse Socket इस सॉकेट की मदद से कम्प्यूटर सिस्टम में माउस को कनेक्ट किया जाता है !
Mouse Socket


Parellel Port इस पैरेलर पोर्ट की मदद से कम्प्यूटर सिस्टम में कोई अन्य device जैसे प्रिंटर आदि को 
कनेक्ट किया जाता है !
Parellel Port

Rear USB Port इस पोर्ट को USB 2.0 कहा जाता है जिससे किसी USB device को कनेक्ट किया जा सकता है
Rear USB Port 
➥➥➥ Introduction To Computer [ कम्प्यूटर का परिचय ]

Mic&Speaker Jack slot इन स्लॉट की मदद से हम कम्प्यूटर सिस्टम में कोई माइक्रोफोन या 
स्पीकर कनेक्ट कर सकते है ! जिससे हम साउंड को स्टोर या प्लये कर सकते है !


Basic application of Computer [कंप्यूटर का मूल आवेदन ]
Post By@ Co-Funder# Vinay Kumar Verma

कम्प्यूटर हमारे दैनिक जीवं में बहुत ही उपयोगी है, कम्प्यूटर के बेसिक अप्लीकेशन निम्नलिखित है ! जैसे की मैंने पिछले पोस्ट में बताये की Introduction To Computer [ कम्प्यूटर का परिचय ] कम्प्यूटर का परिचय आज के इस पोस्ट में बताऊंगा की Basic application of Computer [कंप्यूटर का मूल आवेदन ]
बारे में तो चलिए शुरु करते है

Basic application of Computer


Word Processing  र्ड प्रोसेसिंग के द्वारा हम अपने दैनिक कार्यो को आसानी से कर सकते है, जैसे पत्र टाइपिंग, रिज्यूम तैयार करना आदि कम्प्यूटर स्वत: ही स्पेलिंग एवं ग्रामेटिकल त्रुटी को स्वत सुधर देता है यदि डाक्यूमेंट के कन्टेन्ट रिपीट होते है, तो आपको पुनः टाइपिंग करने की आवश्यकता नहीं है आप अपने डाक्यूमेंट को जिस पर आप कार्य कर रहे है आसानी से अपनी आवश्यकता के अनुसार फारमेंट कर सकता है !

In Banking  बैंक में वर्तमान समय में नेट बैंकिंग बहुत ही पापुलर हो गया है ज्यादातर लोग अपना बैंकिंग कार्य नेट बैंकिंग के माध्यम से ही करता है ! आप नेट बैंकिंग के माध्यम से धनराशी का ट्रान्सफर एक खाते से दुसरे खाते में कर सकते है बैंको में होने वाले दैनिक कार्य लेन-देन कम्प्यूटर के ही सहायता से किये जाते है !

Internet  इंटेरनेट के माध्यम से आप अपने कम्प्यूटर को भारत तथा विश्व के किसी अन्य कम्प्यूटर के साथ जोड़ सकते है ! यह एक वैशिवक प्रणालि है, कम्प्यूटर नेटवर्क को आपस में जोड़ने की इसका आरंभ 1970 और 1980 के दशक में हुवा था ! इंटरनेट के माध्यम से आप अत्यधिक जानकारी प्राप्त कर सकते है अपेक्षा की एक लाईब्रेरी से इसके माध्यम से आप सूचनाओ को बहुत तेजी से अक्सेस कर सकते है ई-मेल के माध्यम से आप कुछ ही समय में हजारो मील दूर बैठे व्यक्ति को सन्देश भेज सकते है !

ये भी पढ़े ➤➤➤➥ कम्प्यूटर का इतिहास

Hospitals असपताल में कम्प्यूटर के माध्यम से ही अपने पेसेंट के रिकाडर्स की जानकारी ले सकते 
है, जैसे पेसेंट का नाम बीमारी आदि !

Digital video or audio composition  डिजिटल विडियो या ऑडियो कम्पोजीशन कम्प्यूटर के द्वारा हम किसी भी प्रकार के ऑडियो या विडिओ को कम्पोज कर सकते, एडिट कर सकते है !

Communication आप विडियो कालिंग, चाटिंग, ई-मेल आदि से परिचित होंगे, कम्प्यूटर के द्वारा आप विडियो कालिंग, चाटिंग, इमेल के माध्यम से एक-दुसरे से बातचित कर सकते है !

Disktop publishing डेस्टोप पब्लिशिंग सभी के लिए उपयोगी पैकेज है, इसके माध्यम से आप डिज़ाइनिंग से सम्बंधित कार्य को कर सकते है ! वर्तमान समय में इसके माध्यम से किताबो की  डिज़ाइनिंग, ग्रीटिंग कार्ड, ब्रोशर, मैगनीज आदि सम्बंधित कार्य किये जाते है !

Telecommunication टेलिकम्यूनिकेशन्स के क्षेत्र में आप देखेंगे की मोबाइल फोन के अन्दर software 
मौजूद रहता है ! जिससे कस्टमर का डिटेल आदि मौजूद रहता है वर्तमान समय में मोबाइल फोन के द्वारा आप किसी भी स्थान का लोकेशन देख सकते है वहां तक पहुचने के मार्ग को देख सकते है ! आप हवाई / रेल टिकट को मोबाइल फोन के द्वारा सुरक्षित कर सकते है आप S.M.S भेजकर रेलवे टिकट के P.N.R की स्थिति जान सकते है !

( अपयुर्क्त के अलावा कम्प्यूटर का उपयोग रक्षा, ई-लर्निंग चिकित्सकीय विज्ञान, खेल, प्रमाण-पत्र, A.T.M मशीन, रोबोट, समाचार, मौसम विश्लेषण आदि में भी किया जा रहा है )


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History of Computers  कम्प्यूटर्स का इतिहास
Post By@ Co- Founder# Vinay Kumar Verma

History of Computers  कम्प्यूटर्स का इतिहास 
आज के इस पोस्ट में बताऊंगा  History of Computers  कम्प्यूटर्स का इतिहास पहले गणना के लिए प्रयोग लायी जाने वाली device में मेकैनिकल device थी, अबैकस को पहला कम्प्यूटर कहा जाता है ! बाद में पास्कल, लारेंस, जैकब, एटासाफबेरी आदि ने कई device बनायीं परन्तु किसी भी device में मेमोरी न थी ! तत्पश्चात सत्रहवी शताब्दी में चार्ल्स बैवेज ने एनालिटिकल और डिफरेंस मशीन का अविष्कार किया जिसमे मेमोरे डाली ! उक्त मशीन के अविष्कार से ही युग की शुरुवात हुई बाद में आज का अविष्कार कम्प्यूटर में मेमोरी सबसे बड़ी विशेषता है इसी के कारण चार्ल्स बैवेज को कम्प्यूटर का पितामह कहा जाता है ENIAC प्रथम इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर है ! यही से इलेक्ट्रॉनिक कम्प्यूटर्स का युग शुरू हो गया

ये भी पढ़े. ➤➤➤ Introduction To Computer

History of Computers  कम्प्यूटर्स का इतिहास


Generation Of Computer  [ कम्प्यूटर की पीढ़ी ]

First Generation (1945-1954) इस प्रथम जनरेशन में वैक्यूम यूट्यूब टैकनोलजी का उपयोग किया गया था, जिसमे कम्प्यूटर को साकार कर गणनाऐ करना संभव किया !

Second Generation (1945-1954) कम्प्यूटर के द्वितिय जनरेशन में ट्रांजिस्टर टैकनोलजी का उपयोग किया गया था, जिसने तब कम्प्यूटर के आकर को थोडा छोटा एवं तेज कर दिया था !

Third  Generation (1965-1974) कम्प्यूटर के तृतीय जनरेशन में इन्टीग्रेटेड सक्रिट्स (आई0 सी0 ) टैकनोलजी का उपयोग किया गया जिसमे ये तुलनात्मक भरोसेमंद तथा तेज समझा गया

Fourth Generation (1975- Till Date ) कम्प्यूटर का चतुर्थ जनरेशन में माइक्रो प्रोसेसर टैकनोलजी का उपयोग किया गया, जो प्रथम द्वितिय तथा तृतीय तीनो ही जनरेशन से काफी तेज, भरोसेमंद तथा साइज़ में छोटा पाया गया जिसे आप आसानी से ही कही भी इधर-उधर उठा एवं रख सकते है और कही भी ले जा सकते है !

Fifth Generation ( Present And Next ) पंचम जनरेशन के कम्प्यूटर में फिसियल (कृत्रिम )  इंटेलिजेंस का उपयोग किया गया, जो इसे कम्प्यूटर टैकनोलाजी में सर्वेपरी सिद्ध करता है जिसमे ये अपना खुद के आई0 क्यू0 का भी इस्तेमाल करता है

Characteristics of Computer [ कम्प्यूटर की विशेषताऐ ]
कम्प्यूटर एक बहुत ही तीव्र कार्य करने वाला इलेक्ट्रॉनिक यंत्र है, जो किसी निर्देश को पल भर में क्रिया करता है ! यह किसी भी कार्य को सेकेंड के एक भाग समय में ही हल कर देता है, जब की उस कार्य को एक ब्यक्ति घंटो तक ही उसे हल कर पायेगा. आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है की एक कम्प्यूटर एक सेकेंड के समय में एक मिलियन या उससे भी अधिक निर्देशों को क्रिया कर सकता है !
  • Accuracy
  • Diligence
  • Storage Capacity
  • Versatility
Accuracy कम्प्यूटर बिना कोई गलती किये पूरा सही-सही गणनाये कर सकता है ! इसकी एक्यूरेसी बहुत अधिक है, जिससे ये कभी भी कोई गलती नहीं करता है और सभी गणनाये में उसी एक्यूरेसी की तरह कार्य करता है ! कम्प्यूटर में कोई गलती तभी आ सकती है जब ब्यक्ति द्वारा गलत इनपुट या निर्देश दिया गया हो !

Diligence कम्प्यूटर किसी भी कार्य को बिना थके लगातार कार्य कर सकता है इसे किसी भी प्रकार की थकान या कमजोरी कभी नहीं होती है जिससे यह किसी कार्य को बिना किसी रुकावट या गलती के लगातार कर सकता है ! कम्प्यूटर के इस क्षमता की वजह से मानव कार्य में काफी विकास हुवा है !
Storage Capacity कम्प्यूटर में किसी भी प्रकार के डाटा या इनफार्मेशन को इसके मेमोरी में स्टोर कर सकते है ! कम्प्यूटर में मैग्नेटिक मिडिया स्टोरेज होते है, जो अत्यधिक मात्रा में डाटा या सूचनाओ को परमानेट सुरक्षित रखने की सहूलियत देते है ! जैसे, हार्ड डिस्क, फ्लापी डिस्क, आप्टिकल डिस्क, आदि जिनकी मदद से आप कम्प्यूटर में कोई डाटा किसी एक स्थान से दुसरे स्थान तक ले जा सकते है !

Versatility  कम्प्यूटर की एक बहुत अच्छी विशेषता इसकी विविधता है, जो एक ही समय में कई कार्य को कर सकता है जैसे, डाक्यूमेंट, ड्राफ्टिंग के दौरान म्यूजिक सुनना कोई पेज प्रिंट करना आदि ! यह यूजर पर निर्भर करता है की वह कम्प्यूटर सिस्टम पर किस तरह का कार्य कर सकता है क्यूकी ये बिलकुल अलग-अलग तरह के कार्य करने में सक्षम है !

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